तुम्हें पता है जब तुम बोलती हो तो हवाओं में रूमानियत की बूंदे तैरने लगती है. जब तुम हंसती हो तो प्यार की ये बूंदे बरसने लगती है. मैं बस खो जाता हूँ तुम्हारी माशुम आँखो की गहराइयो में जो समेट लेती है इन बारीशो को. और फिर मोती बनकर तुम्हारी आँखो में चमकती इन बूँदो में मुझे सारी दुनिया प्यार में डूबा नज़र आने लगता है.
तुम्हारी आंखे तुम्हारी बातें तुम्हारी मुस्कुराहते मुझे जीना सिखाती है. तुम प्यार में हो या प्यार तुम में नहीं पता पर तुमसे ही जाना है मैंने प्यार को. बस तुमसे ही, तुम्हारा आकाश !!
आकाश !! मेरे शब्दों से हवाओं में रूमानियत की रंगत है, क्योंकि ये शब्द सिर्फ़ तुम्हारे लिए है. मेरी हंसी तुम्हें बारिश सी लगती है.
पर इस बारिश को बरसाने वाले बादल तुम ही तो हो…. मेरी आँखो में जो मासूमियत दिखती है. वो तुम पर मेरा बिस्वास है.
तुम्हें सारी दुनिया का प्यार मेरी आँखो में इसलिए नज़र आता है, क्योंकि इन्हे देखने वाली आंखे तुम्हारी है.
मेरे पंखों को उड़ान देने वाले आकाश !! तुमने भले ही मुझसे प्यार को जाना होगा, पर मैंने तुम्हारे साथ प्यार को जिया है, हर पल हर लम्हा.
मेरी आँखो, मेरी बातों और मेरी हंसी में जीवन भरने वाले सिर्फ़ तुम हो.. सिर्फ़ तुम.और में हूँ …तुम्हारी पंच्छी !!!
आकाश : तुम्हें पता है तुम्हारी सबसे अच्छी बात क्या है?
पंच्छी : क्या?
आकाश : यही कि तुम बहुत-बहुत अच्छी हो.
पंच्छी : तुम्हें पता है तुम में सबसे अच्छा क्या है?
आकाश : क्या?
पंच्छी : तुम्हें सिर्फ़ अच्छाई को सराहना ही नहीं आता उसे सहेजना और सवारना भी आता है.
आकाश : वो इन्सान ही क्या जो अच्छाई को कदर न जाने… तुझसे जुड़े कोई और तुझे चाहे. वो प्यार करना भी भला क्या जाने?
पंच्छी : तेरे प्यार की गहराइयों की कायल हूँ मैं. होंठ सील देती हो. अक्सर तेरी बातें. खैर! तेरी तो खामोशियो की भी घायल हूँ मैं…
पंच्छी : तुमने सुनी है कभी खामिशियों की आवाज़?
आकाश : हाँ, बहुत बार…
पंच्छी : क्या कहती है खामोशिया?
आकाश : खामोशिया अक्सर करती है तुम्हारी बातें. पता ही नहीं चलता… कब जागता है दिन और कब सोती है रातें.
आकाश : अच्छा ! तुमने भी सुना है कभी खामोशियों को?
पंच्छी : हाँ, सुना है न !! ये शोर भी लगते है खामोशियो के हिस्से… इन खामोशियो में सुनती हूँ मैं… हमारी खामोशियो के किस्से……